Wednesday, January 19, 2011

काफी टाइम हो गया है स्कूल छोड़े हुये. अब कोई भी काम फुरसत वाला करो तो लगता है टाइम बर्बाद कर रहे हैं. क्या ये सच  है ? मैदान मैं गये हुये सालों बीत गये हैं. कभी- कभार चले भी गये तो लगता है की टाइम बर्बाद कर दिया घर मैं खाली सोये  रहते हैं दिन भर फिल्में और  टीवी देखते रहते हैं. 
     तब एक पल भी एहसाश नही होता की कितना समय बर्बाद हुवा अब तो professional बन गये हैं . आसमान की तरह भी देखे हुये काफी वक़्त हो गया है ,कभी सोचा ऐसा क्यों होता है मेरी समझ मैं यह आया की अब हम सच्ची खुशी प्राकृतिक तौर पर नही , किसी और तरीके से प्राप्त करना चाहते हैं. शायद हमसे ज्यदातर खुशी का मतलब पैसा मानते होंगे और हर वक़्त  पैसा बनाने की सोचते होंगे और थोडा खाली रहे तो लगता है आज काफी वक़्त बर्बाद कर लिया . बच्चो को खेलते देखना, किसी से बात करना ? वक़्त बर्बाद करना   होता है क्या आज के वक़्त को देख कर मुझे एक गाना याद आ गया " दिल ढूंढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन " . 

1 comment:

  1. इस नए सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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