Tuesday, May 10, 2011

पिछले सन्डे एक नया एहसाश लाया घर पर बैठा था ! कुछ फुरसत थी ! टीवी का हर चैनल बदला कहीं न कहीं कुछ आ रहा था ! पर सकून कहीं न था ! एक अजीब सी बेचनी, तभी दूरदर्शन का चैनल लग गया उस वक़्त उस पर विज्ञापन आ रहा था ! देखकर पहले तो हँसी आयी! की ये आज भी वही पुराने सिस्टम पर चल रहा है ! ख्याल आया देश का चैनल जिसके पास शायद ही पैसे की कमी होगी ! फिर भी वही पुराने ढरे पर चल रहा है !
एक विकसित देश का पिछड़ा -सा गांव लगा , लेकिन फिर उसमें वही आनंद आया जो एक विकसित देश के नागरिक को एक पिछड़े हुये गावं मैं जाने के बाद आता है ! सारी थकान सारी चिडचिड़ाहट दूर हो गयी ! सन्डे को मैं आमतौर पर दिन मैं सो जाता हूँ पर उस दिन नीद नही ही आयी ! बस एक अजीब सा उमंग था जैसे कई सालों के बाद मिले हों ! लेकिन इसके साथ दूरदर्शन की टीम को भी दिल से शुभकामनायें आ रही थी जिसने मशीनी युग मैं भी इमोशन को अपने साथ जोड़े रखा !

No comments:

Post a Comment