Tuesday, March 15, 2011

डर

डर एक ऐसा शब्द है जिससे हर कोई दूर रहना चाहते हैं , पर रह नही सकते डर का रिश्ता आप की साँसों से है जब तक दिल धडकता रहेगा, डर आप के साथ चलता रहेगा | आप ये नही कह सकते की आप की जिंदगी मैं डर नही है | डर होगा जरुर होगा! डर के रूप अनेक है | किसी ना किसी रूप मैं आपके पास भी होगा | डर की और एक खासियत है ये आप को बुरा भी बनाता है और अच्छा भी बनाता है | ये तो आप की सोच पर निर्भर करता है की आप किस तरफ बढ़ना चाहते हैं | डर कोई भी हो ,ज्यादातर आप के लिए अच्छा ही करता है, अगर आप डर को सकारात्मक तरीके से लेंगे तो हमेशा ही सही काम करेंगे| जैसे की अगर आप को कानून का डर ना हो, तो आप कानून तोड़ेंगे | आप को कानून का डर बना रहे इसलिए आप भी सही तरीके से चलते हैं | मेरा तो ऐसा मानना है की अगर आप किसी की इज्जत करते हैं तो उसके पीछे भी डर हो सकता है | बच्चपन मैं आप को ऐसा डरा कर कराया जाता है | बड़े हो कर आप ऐसा इज्जत के लिए करते हैं | आप पढाई करते हैं तो डर के साथ कहीं फेल ना हो जाऊं | नम्बर काम आ गये तो दाखिला नही मिलेगा | आप की जिंदगी की शुरुवात ही डर के साथ होती है | माँ -बाप भी आप की परवरिश एक डर के साथ ही करते हैं | कुछ भी कहो डर है चीज़ लाजबाब | ये आप को इंसान से शैतान तक सब कुछ बना देती है | लेकिन इसकी कुछ नकारात्मक बातें भी हैं | ये आप को आगे बढ़ने से भी रोकती है | अगर आप कुछ काम करने जा रहे हैं, लेकिन आप को डर है की मैं इस काम मैं सफल हो पाऊंगा की नही और काम ने असफल होने के डर से काम ही नही किया तो फिर तो काम से पहले ही रिजल्ट मिल गया | मेरा तो मानना ये ही की डर के साथ जियो,मगर बेहतरी के लिए,सकारात्मक सोच के साथ |

No comments:

Post a Comment