व्यस्तता
जिंदगी कितनी व्यस्त है आदमी को सांस लेने की भी फुर्सत नही है उसके पास किसी के लिए टाइम नही है, खुद के लिए भी नही आस -पड़ोस तो दूर की बात है! आदमी पहले शौच के लिए बाहर दूर जंगल मैं जाता था, फिर उसने आँगन मैं बनाया , फिर अपने घर के अंदर अब जा जाने आगे कहाँ जायेगा !
घंटे, दिन, महीने, साल सभी तो अपनी जगह पर है किसी का भी कोई हिस्सा कम नही हुआ फिर इंसान के पास टाइम की कमी कहाँ से हो गयी जाहिर सी बात है ये रिसर्च की बात है!
आज का दौर बिलकुल नया दौर है ! लोगों ने निर्जीव चीजों से लगाव रख लिया है! टीवी इन्टरनेट मोबाइल से लोग आज कल टच मैं रहने की बातें करते हैं पर भूल गये हैं की 'जो लगाव साथ रहने से है वो दूर होकर करीब रहने मैं नही" अभी कुछ ही दिनों की बात है मैं एक शादी मैं गया था बिना किसी से मिले खाना खाए ही लौट आया! ऐसा नही है की कोई बात थी या मुझे कोई और शादी मैं जाना था,
लेकिन फिर भी दिल मैं लेट होने का डर था! दरअसल हम इतने व्यस्त होते नही हैं जितना की अपने आप को दिखाते हैं. वरना एक रात की शादी मैं जाना और कुछ घंटे ठहरना कोन सी बड़ी बात है!
खुद मेरे साथ ऐसा होता है अगर कभी आप को लगे की कही जाना है तो दिल खोल के जाइये टाइम अपने आप निकल आएगा , और आप को भी ख़ुशी मिलेगी
हरीश
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