Tuesday, May 10, 2011

पिछले सन्डे एक नया एहसाश लाया घर पर बैठा था ! कुछ फुरसत थी ! टीवी का हर चैनल बदला कहीं न कहीं कुछ आ रहा था ! पर सकून कहीं न था ! एक अजीब सी बेचनी, तभी दूरदर्शन का चैनल लग गया उस वक़्त उस पर विज्ञापन आ रहा था ! देखकर पहले तो हँसी आयी! की ये आज भी वही पुराने सिस्टम पर चल रहा है ! ख्याल आया देश का चैनल जिसके पास शायद ही पैसे की कमी होगी ! फिर भी वही पुराने ढरे पर चल रहा है !
एक विकसित देश का पिछड़ा -सा गांव लगा , लेकिन फिर उसमें वही आनंद आया जो एक विकसित देश के नागरिक को एक पिछड़े हुये गावं मैं जाने के बाद आता है ! सारी थकान सारी चिडचिड़ाहट दूर हो गयी ! सन्डे को मैं आमतौर पर दिन मैं सो जाता हूँ पर उस दिन नीद नही ही आयी ! बस एक अजीब सा उमंग था जैसे कई सालों के बाद मिले हों ! लेकिन इसके साथ दूरदर्शन की टीम को भी दिल से शुभकामनायें आ रही थी जिसने मशीनी युग मैं भी इमोशन को अपने साथ जोड़े रखा !

Monday, March 21, 2011

Mr. Dutt: The dark night

Mr. Dutt: The dark night: "The dark night अँधेरा एक ऐसा शब्द है जिसे कोई भी अपनी जिंदगी मैं नही लाना चाहता, कोई भी नही! हर कोई चाहता है की उसका जीवन प्रकाश मय हो! ..."

Tuesday, March 15, 2011

डर

डर एक ऐसा शब्द है जिससे हर कोई दूर रहना चाहते हैं , पर रह नही सकते डर का रिश्ता आप की साँसों से है जब तक दिल धडकता रहेगा, डर आप के साथ चलता रहेगा | आप ये नही कह सकते की आप की जिंदगी मैं डर नही है | डर होगा जरुर होगा! डर के रूप अनेक है | किसी ना किसी रूप मैं आपके पास भी होगा | डर की और एक खासियत है ये आप को बुरा भी बनाता है और अच्छा भी बनाता है | ये तो आप की सोच पर निर्भर करता है की आप किस तरफ बढ़ना चाहते हैं | डर कोई भी हो ,ज्यादातर आप के लिए अच्छा ही करता है, अगर आप डर को सकारात्मक तरीके से लेंगे तो हमेशा ही सही काम करेंगे| जैसे की अगर आप को कानून का डर ना हो, तो आप कानून तोड़ेंगे | आप को कानून का डर बना रहे इसलिए आप भी सही तरीके से चलते हैं | मेरा तो ऐसा मानना है की अगर आप किसी की इज्जत करते हैं तो उसके पीछे भी डर हो सकता है | बच्चपन मैं आप को ऐसा डरा कर कराया जाता है | बड़े हो कर आप ऐसा इज्जत के लिए करते हैं | आप पढाई करते हैं तो डर के साथ कहीं फेल ना हो जाऊं | नम्बर काम आ गये तो दाखिला नही मिलेगा | आप की जिंदगी की शुरुवात ही डर के साथ होती है | माँ -बाप भी आप की परवरिश एक डर के साथ ही करते हैं | कुछ भी कहो डर है चीज़ लाजबाब | ये आप को इंसान से शैतान तक सब कुछ बना देती है | लेकिन इसकी कुछ नकारात्मक बातें भी हैं | ये आप को आगे बढ़ने से भी रोकती है | अगर आप कुछ काम करने जा रहे हैं, लेकिन आप को डर है की मैं इस काम मैं सफल हो पाऊंगा की नही और काम ने असफल होने के डर से काम ही नही किया तो फिर तो काम से पहले ही रिजल्ट मिल गया | मेरा तो मानना ये ही की डर के साथ जियो,मगर बेहतरी के लिए,सकारात्मक सोच के साथ |

Thursday, March 10, 2011

time

व्यस्तता
जिंदगी कितनी व्यस्त है आदमी को सांस लेने की भी फुर्सत नही है उसके पास किसी के लिए टाइम नही है, खुद के लिए भी नही आस -पड़ोस तो दूर की बात है! आदमी पहले शौच के लिए बाहर दूर जंगल मैं जाता था, फिर उसने आँगन मैं बनाया , फिर अपने घर के अंदर अब जा जाने आगे कहाँ जायेगा !
घंटे, दिन, महीने, साल सभी तो अपनी जगह पर है किसी का भी कोई हिस्सा कम नही हुआ फिर इंसान के पास टाइम की कमी कहाँ से हो गयी जाहिर सी बात है ये रिसर्च की बात है!

आज का दौर बिलकुल नया दौर है ! लोगों ने निर्जीव चीजों से लगाव रख लिया है! टीवी इन्टरनेट मोबाइल से लोग आज कल टच मैं रहने की बातें करते हैं पर भूल गये हैं की 'जो लगाव साथ रहने से है वो दूर होकर करीब रहने मैं नही" अभी कुछ ही दिनों की बात है मैं एक शादी मैं गया था बिना किसी से मिले खाना खाए ही लौट आया! ऐसा नही है की कोई बात थी या मुझे कोई और शादी मैं जाना था,
लेकिन फिर भी दिल मैं लेट होने का डर था! दरअसल हम इतने व्यस्त होते नही हैं जितना की अपने आप को दिखाते हैं. वरना एक रात की शादी मैं जाना और कुछ घंटे ठहरना कोन सी बड़ी बात है!
खुद मेरे साथ ऐसा होता है अगर कभी आप को लगे की कही जाना है तो दिल खोल के जाइये टाइम अपने आप निकल आएगा , और आप को भी ख़ुशी मिलेगी
हरीश

Tuesday, March 8, 2011

happy womens day

सबको हैप्पी वुमेन्स डे कहना चाहता हूँ. सारी माहिलाओ को, सारी बच्चियों को , सारी नारी जाति को पर क्या सबको हैप्पी कहने
भर देने से वो हैप्पी हो जाएँगी. ऐसा नही है! अगर ऐसा होता तो कोई भी महिला अपने आप को असुरिक्षित महसूस नही करती. रात की तो आप बात छोडिये दिन मैं वो महफूज़ नही है. आज कल हर कही पर पड़ने मैं आता है २१ century , नारी आजाद है नारी चाँद पर है पर क्या वो ज़मीन पर सही तरीके से है. नही! ऐसा इसलिए है की आज भी कई लोगों की मानसिकता मै अंतर नही आया है. वो आज भी उसे घर मैं देखना चाहते हैं.वो नही चाहते की वो आगे बढे, कुछ करे.
हैप्पी वुमंस डे कह कर नारी समाज का भला नही होने वाला इसके लिए कुछ करने की भी जरुरत नही सिर्फ अपनी सोच बदल दीजिये. आरक्षण देने से , मेट्रो मैं या बसों मैं सीटें रिजर्व करने से या फिर अलग से महिलाओं की कोई लाइन बना कर कुछ भी नही होने वाला. मैं तो यही चाहता हूँ की ऐसा कोई दिन मनाने की जरुरत ही ना पड़े हैप्पी वुमेन्स डे

Wednesday, January 19, 2011

fursat

काफी टाइम हो गया है स्कूल छोड़े हुये. अब कोई भी काम फुरसत वाला करो तो लगता है टाइम बर्बाद कर रहे हैं. क्या ये सच  है ? मैदान मैं गये हुये सालों बीत गये हैं. कभी- कभार चले भी गये तो लगता है की टाइम बर्बाद कर दिया घर मैं खाली सोये  रहते हैं दिन भर फिल्में और  टीवी देखते रहते हैं. 
     तब एक पल भी एहसाश नही होता की कितना समय बर्बाद हुवा अब तो professional बन गये हैं . आसमान की तरह भी देखे हुये काफी वक़्त हो गया है ,कभी सोचा ऐसा क्यों होता है मेरी समझ मैं यह आया की अब हम सच्ची खुशी प्राकृतिक तौर पर नही , किसी और तरीके से प्राप्त करना चाहते हैं. शायद हमसे ज्यदातर खुशी का मतलब पैसा मानते होंगे और हर वक़्त  पैसा बनाने की सोचते होंगे और थोडा खाली रहे तो लगता है आज काफी वक़्त बर्बाद कर लिया . बच्चो को खेलते देखना, किसी से बात करना ? वक़्त बर्बाद करना   होता है क्या आज के वक़्त को देख कर मुझे एक गाना याद आ गया " दिल ढूंढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन " . 
काफी टाइम हो गया है स्कूल छोड़े हुये. अब कोई भी काम फुरसत वाला करो तो लगता है टाइम बर्बाद कर रहे हैं. क्या ये सच  है ? मैदान मैं गये हुये सालों बीत गये हैं. कभी- कभार चले भी गये तो लगता है की टाइम बर्बाद कर दिया घर मैं खाली सोये  रहते हैं दिन भर फिल्में और  टीवी देखते रहते हैं. 
     तब एक पल भी एहसाश नही होता की कितना समय बर्बाद हुवा अब तो professional बन गये हैं . आसमान की तरह भी देखे हुये काफी वक़्त हो गया है ,कभी सोचा ऐसा क्यों होता है मेरी समझ मैं यह आया की अब हम सच्ची खुशी प्राकृतिक तौर पर नही , किसी और तरीके से प्राप्त करना चाहते हैं. शायद हमसे ज्यदातर खुशी का मतलब पैसा मानते होंगे और हर वक़्त  पैसा बनाने की सोचते होंगे और थोडा खाली रहे तो लगता है आज काफी वक़्त बर्बाद कर लिया . बच्चो को खेलते देखना, किसी से बात करना ? वक़्त बर्बाद करना   होता है क्या आज के वक़्त को देख कर मुझे एक गाना याद आ गया " दिल ढूंढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन " .